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अयोध्या श्रीराम मंदिर परिसर: चढ़ावे की चोरी के आरोपों से घिरे ‘टिन्नू यादव’ की कार्यशैली पर सवाल

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों से सुर्खियों में 'टिन्नू यादव': ड्राइवर से लेकर ट्रस्ट के सबसे 'पावरफुल' व्यक्ति तक का सफर राम मंदिर ट्रस्ट का कर्मचारी टिन्नू यादव विवादों में: 8 महीने की सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)

अयोध्या: श्रीराम मंदिर परिसर में ‘टिन्नू यादव’ के बढ़ते प्रभाव और आरोपों पर विशेष पड़ताल

  • अयोध्या विशेष पड़ताल: दानपेटियों से लेकर बैंक तक, टिन्नू यादव कैसे संभालता था श्रीराम मंदिर का चढ़ावा और सुरक्षा?
  • श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच शुरू: SIT के घेरे में चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव का बढ़ता प्रभाव और संपत्ति
  • क्या टिन्नू यादव के पास है राम मंदिर की चाबी? पूर्व लेखा प्रभारी ने लगाए बड़े आरोप, सीसीटीवी से लेकर जेवर गायब करने तक की बात

अयोध्या। श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद ‘टिन्नू यादव’ (राम शंकर यादव) सुर्खियों में है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू पर मंदिर परिसर में सुरक्षा प्रबंधन से लेकर चढ़ावे को बैंक में जमा कराने तक की अहम जिम्मेदारी है। हालांकि, उन पर वित्तीय अनियमितताओं और सीसीसीटी फुटेज से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगे हैं, जिनका उन्होंने खंडन किया है।श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिसके केंद्र में ‘टिन्नू यादव’ (राम शंकर यादव) का नाम सामने आया है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू पर परिसर में सुरक्षा प्रबंधन से लेकर चढ़ावे को बैंक में जमा कराने तक की अहम जिम्मेदारी है। हालांकि, उन पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

​ड्राइवर से ट्रस्ट में ‘पावरफुल’ भूमिका तक का सफर

​टिन्नू की कहानी 1994-95 के दौर में शुरू हुई जब वह अयोध्या में टेंपो चलाया करते थे। बाद में वे श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महेश नारायण के संपर्क में आए और उनके ड्राइवर बन गए। 2002 में महेश नारायण के निधन के बाद वे चंपत राय के संपर्क में आए और कारसेवपुरम में वाहन चलाने लगे। धीरे-धीरे वे चंपत राय के विश्वस्त लोगों में शामिल हो गए। 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब मंदिर निर्माण शुरू हुआ, तो ट्रस्ट ने उन्हें वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में काम पर रखा।टिन्नू की पृष्ठभूमि के बारे में बताया जाता है कि वह मूलतः अयोध्या के नया घाट का रहने वाला है, जहाँ उसके पिता चाय बेचा करते थे।

  • उसका शुरुआती जीवन संघर्षपूर्ण था और 1994-95 के दौरान वह अयोध्या में टेंपो चलाता था।
  • बाद में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महेश नारायण के संपर्क में आया और उनकी कार का ड्राइवर बना।
  • 2002 में महेश नारायण के निधन के बाद वह चंपत राय के संपर्क में आया और कारसेवपुरम में अलग-अलग वाहन चलाने लगा, जिससे वह चंपत राय के विश्वस्त लोगों में शामिल हो गया।
  • 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब मंदिर निर्माण शुरू हुआ, तो ट्रस्ट ने उसे एक आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में नियुक्त किया।

​क्या हैं गंभीर आरोप?

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने टिन्नू की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं:

  • वित्तीय हेराफेरी का दावा: राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का आरोप है कि टिन्नू दानपेटियों के चढ़ावे को बैंक में जमा कराने का काम करता था, लेकिन सोने-चांदी के जेवरों का वजन किए बिना उन्हें सिर्फ अनुमान के आधार पर रखा जाता था।
  • सीसीटीवी डिलीट करने का आरोप: महिपाल का दावा है कि 2021 में टिन्नू ने एक निजी कर्मचारी के साथ मिलकर करीब 8 महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट करवाई थी।
  • संपत्ति में वृद्धि: स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर से जुड़ने के बाद टिन्नू ने काफी तरक्की की है। उनके पास एक हॉस्टल, लखनऊ में घर और कृषि योग्य भूमि होने की चर्चा है।
  • ​महिपाल का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने नोट गिनने में हो रही हेराफेरी की शिकायत चंपत राय से की, तो बाद में उन्हें गिनती के काम से ही हटा दिया गया।

टिन्नू की संपत्ति और जीवनशैली में बदलाव

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर से जुड़ने के बाद टिन्नू की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार हुआ है:

  • टिन्नू के पिता अयोध्या के नया घाट पर चाय बेचा करते थे।
  • उसका करियर 1994-95 में शुरू हुआ, जब वह अयोध्या की सड़कों पर टेंपो चलाता था।
  • वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आया और उनकी कार का ड्राइवर बन गया।
  • 2002 में महेश नारायण के निधन के बाद, वह चंपत राय के संपर्क में आया और कारसेवपुरम में अलग-अलग गाड़ियाँ (जीप से लेकर मालवाहक वाहन तक) चलाने लगा।
  • 2019 में मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद, ट्रस्ट ने उसे एक आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में रखा, जहाँ उसे हर महीने 22 हजार रुपये से अधिक का वेतन मिलता था।
  • टिन्नू के पास नाका इलाके में एक शानदार दो मंजिला मकान है, जिसमें 14 कमरे किराए पर दिए गए हैं और जिनसे प्रतिमाह लगभग 37 हजार रुपये किराया आता है।
  • चर्चा है कि उसने बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में 20 से 22 बीघा खेती की जमीन खरीदी है।
  • उसके पास एक हॉस्टल और लखनऊ में एक घर होने की बात भी कही जा रही है।
  • उसका पुश्तैनी घर मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर स्वर्गदारी मोहल्ले में है, जबकि हाल ही में उसका एक नया दो मंजिला आलीशान मकान नाका इलाके में मिला है।
  • इस नए मकान में 14 कमरे हैं, जहाँ से प्रतिमाह लगभग 37 हजार रुपये का किराया आता है।
  • आरोप है कि उसने बस्ती जिले के विक्रमजोत में 20 से 22 बीघा कृषि भूमि खरीदी है और उसके पास लखनऊ में भी एक घर है।
  • रामजन्म भूमि परिसर में भी उसकी तीन गाड़ियाँ अनुबंध पर चल रही हैं।

टिन्नू यादव का पक्ष

​अपने ऊपर लगे आरोपों पर टिन्नू यादव ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए ये कहानियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल एक कर्मचारी हैं और मंदिर में केवल रामजी की चलती है। सीसीसीटी फुटेज डिलीट करने के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह झूठ बताया है।इन आरोपों पर टिन्नू का कहना है कि उसे बदनाम करने के लिए एक कहानी बनाई जा रही है और यदि किसी के पास साक्ष्य हैं, तो उन्हें पेश करना चाहिए। उसने बैंक कर्मचारियों को नियुक्त करवाने और सीसीटीवी फुटेज डिलीट करवाने के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। टिन्नू का तर्क है कि वह केवल एक कर्मचारी है और मंदिर में केवल “रामजी की चलती है”।

​फिलहाल, मंदिर ट्रस्ट ने इस मामले में कोई एफआईआर नहीं की है, लेकिन सरकार ने जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन किया है।

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